"यादें"
नव्ज कभी थमते कभी धड़कते हैं
जब आँखों में छाया तेरी होती हैं
हाथ कभी बढ़ते कभी रुकते हैं
और तुम वहां नहीं होती हैं
नव्ज कभी थमते कभी धड़कते हैं
आवाज खिलखिलाने की वयां होती हैं
फिर से दिल में धड़कने जवां होती हैं
देखते हैं कभी आगे तो कभी पीछे
और तुम न जाने कहाँ होती हैं
नव्ज कभी थमते कभी धड़कते हैं
- राजेश त्रिपाठी
नव्ज कभी थमते कभी धड़कते हैं
जब आँखों में छाया तेरी होती हैं
हाथ कभी बढ़ते कभी रुकते हैं
और तुम वहां नहीं होती हैं
नव्ज कभी थमते कभी धड़कते हैं
आवाज खिलखिलाने की वयां होती हैं
फिर से दिल में धड़कने जवां होती हैं
देखते हैं कभी आगे तो कभी पीछे
और तुम न जाने कहाँ होती हैं
नव्ज कभी थमते कभी धड़कते हैं
- राजेश त्रिपाठी
