ज़हर ही पी लिया मैंने

ज़हर ही पी  लिया मैंने

तेरी यादों की खुशबू में, लिपट कर सो लिया मैंने 
बढ़ी जब दर्द की सीमा, सिसक कर रो लिया मैंने 

ख़ुशी के पल हो या ग़म के, हर शाम जी लिया मैंने 
अँधेरी रात की तन्हायों में, जज़्बाती जाम पी लिया मैंने  

सर रख कर तेरी पहलू में, दो पल जी लिया मैंने 
मोहब्बत जो दिया तूने, दिल में कैद कर लिया मैंने

जाते हुए लम्हों को, हँसते हँसते विदा कर दिया मैंने 
पल ख़ुशी के थे या गम के, शुक्रिया अदा कर दिया मैंने 

सभी ने रोका मगर, इश्क़ का रोग ले ही लिया मैंने 

दवा जब नहीं मिली तो , ज़हर ही पी  लिया मैंने

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