दर्द
"दर्द"
मैं अश्क का वो दमन हूँ
जिसमे पानी का कोई बूंद नहीं
मैं उस चमन का माली हूँ
जिसमे फूलों और काँटों में कोई भेद नहीं
वाकई मैं हसता हुआ दर्द हूँ
जिसमे आन्नद की कोई कमी नहीं
मैं धुप में खड़ा बेहये का वृक्ष हूँ
जिसके हरे पन में कोई कमी नहीं
मैं कोई अजनबी नहीं
खुशी का प्रथम पद दर्द हूँ
मैं अश्क का वो दमन हूँ
जिसमे पानी का कोई बूंद नहीं
- राजेश त्रिपाठी
मैं अश्क का वो दमन हूँ
जिसमे पानी का कोई बूंद नहीं
मैं उस चमन का माली हूँ
जिसमे फूलों और काँटों में कोई भेद नहीं
वाकई मैं हसता हुआ दर्द हूँ
जिसमे आन्नद की कोई कमी नहीं
मैं धुप में खड़ा बेहये का वृक्ष हूँ
जिसके हरे पन में कोई कमी नहीं
मैं कोई अजनबी नहीं
खुशी का प्रथम पद दर्द हूँ
मैं अश्क का वो दमन हूँ
जिसमे पानी का कोई बूंद नहीं
- राजेश त्रिपाठी

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