फैसला
"फैसला"
आज मैं इस शांत
चाँदनी रात में
तारों की टिमटिमाहाट के साथ
कर लेना चाहता हूँ
फैसला जो अक्सर परेशान
कर दिया करता है
बुरा हो या भला
आज निश्चित करना होगा फैसला
क्योंकी मैं बहुत नज़दीक
पहुँच गया हूँ इसके
हलांकि एक सपना टूट कर
बिखर गया है उस समतल मैदान में
जिसकी सीमा कहाँ तक है
मुझे नहीं पता
हवा के झोंके टूटे टुकड़े को भी
नहीं रहने देना चाहते
वे तरतीब कर दे रहे है
सूर्य भी दखल देना चाहता है
इसमें
क्यूंकि उसको भी जल्दी हो गयी हैं
कल का वादा करके दूर हो रहा है
मुझसे - निश्चित आएंगे
आखिर इतने के बाद
किसी अन्य फैसले के अलावां
और कर ही क्या सकता हूँ
क्यूंकि सपना टूट गया हैं
मेरी लापरवाही से उसे
उस रूप में जोड़ना मुश्किल ही
नहीं नामुमकिन भी हैं
सभी पूछेंगे फैसले का राज
और मुझे साफ साफ बताना होगा
इतना ही नहीं कुछ मांगना भी
पड़ेगा उनसे
क्यूंकि फैसले ही कुछ ऐसा है
अरे !
आप आगये इतने जल्दी
चिड़ियों के कलरौवगान के साथ
इस भूमण्डल में पूर्ण प्रकाश
लेकर ,
मैंने किया नित्य क्रिया कर्म
और उस वृद्धा (पुरानी साइकिल) ने दिया सहारा
जिसे लोग छूने से डरते हैं
किया प्रस्थान फैसले को
साकार करने की कोशिश में

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